Wednesday, June 11, 2008

हम अमरीका भाग जायेंगे....


शान बघारें, शोर मचायें
चिल्ल-पों, चीखें चिल्लायें
तोडें फोडें, आग लगायें
हमसे आजादी का मतलब
पूछ समंदर डूब गया था
आशाओं का बरगद सूखा
हम पानी के वही बुलबुले
उगते हैं, फट फट जाते हैं
हम खजूर के गाछ सरीखे
गूंगे की आवाज सरीखे
बेमकसद बेगैरत बादल
अंधे की आँखों का काजल
सूरज को ढाँप रहा, काला धुवां हैं
निर्लज्ज युवा हैं....

हमें ढूंढो, मिलेंगे हम
कोनों में, किनारों में
अगर कुछ शर्म होगी तो
तुम्हें मुँह फेरना होगा
नयी पीढी हैं, बेची है
यही एक चीज तो हमनें
वही हम्माम के भीतर
वही हम्माम के बाहर
जो नंगापन हकीकत है
हमारी सीरत है....

बहुत ताकत है बाहों में
बदन कसरत से गांठा है
बाँहों पर उभरते माँस के गोले
मगर बस ठंडे ओले हैं
वो कमसिन बाँह में आये
यही बाहों का मक्सद है
नयन दो चार हो जायें,
निगाहों का मक्सद है
वही डिगरी है, जिसमें
तोड कुर्सी लूट खाना है
मकसद ज़िन्दगी का
एक आसां घर बसाना है
न पूछो, चुल्लुओं पानी है
फिर भी जी रहे क्यों हैं....

मगर तुम पाओगे हमको
जहाँ भी आग पाओगे
कभी दूकान लूटोगे अगर
या बस जलाओगे
हम ही तो भीड हैं
जो भेड हो कर बहती जाती है
हम ईमान के चौकीदार हैं
धर्म के सिक्युरिटी गार्ड हैं हम....

लेकिन उम्मीद न रखना
वृद्ध, तिरस्कृत से देश मेरे
तुम्हारी आवाज हम सुन नहीं पाते
नमक हराम, अहसान फरोश, नपुंसक हैं हम
तुम चीख चीख कर यह कहोगे
तो क्या हम जाग जायेंगे?
तुम डूबता जहाज हो
हम अमरीका भाग जायेंगे...

*** राजीव रंजन प्रसाद
20.05.2007

4 comments:

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

गजब का फ्लो.. बहुत बढ़िया रचना...

हरिमोहन सिंह said...

हकीकत के करीब लिखा है जनाब आपने

छत्तीसगढिया .. Sanjeeva Tiwari said...

राजीव जी, धन्यवाद । आपने टेम्पलेट बहुत सुन्दर लगाया है ।

हेडर में जो फोटो हैं उसे थोडा लम्बा कर लेवें । या कोई इसी लम्बाई का फोटो चुने या फोटो निकाल दें बाकी बहुत खूबसूरत लग रहा है आपका ब्लाग, मैं दो अलग अलग लैपटाप में यह देख रहा हूं, ज्यादा रेज्यूल्येशन के मानीटर पर तो और भी खूबसूरत ।


हां फायर फाक्स में आपके शव्द सहीं नहीं दिखते क्योंकि आप शुरू से टेक्स्ट जस्टीफाई करते हैं मुझे आपके व मानस जी के ब्लाग को पढने के लिये एक्सप्लोरर में जाना पढता है मित्रों के प्रेम और उत्कृष्ठ पढनीय सामाग्री के कारण ऐसा करना ही पडता है वैसे इसका तोड भी फायर फाक्स के आगे के वर्जनों आ जायेगा ।

संजीव

Udan Tashtari said...

रचना बहुत जगाती हुई है.

ब्लॉग की नई साज सज्जा बहुत बढ़िया है, बधाई.