Thursday, June 05, 2008

तुम मुझे मार दोगी न माँ?

अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट आ गयी है
तुम जान गयी हो
कि तुम्हारे भीतर एक तितली है
तुम मार दोगी न मुझे माँ?

जब आहिस्ता-आहिस्ता
थमने लगेगी दिल की धडकन
और मैं पिघल जाउंगी
तुम्हारी ही कोख के भीतर
तुम्हारी आँख में आँसू तो न होगा?

आँखें बंद करो माँ
अपने ही जीवन को केनवास समझो
एक चित्र रचो मेरा
रंग भरो कल्पना के सारे
देखो मैं पंछी हूँ, सुन लो मैं गाती हूँ
छू लो मैं पंखुडी गुलाब की
मखमल सी सुबहा हूँ, गुलाबी शाम सलोनी
महसूस करो सतरंगी रंगों को सपनों में
महसूस करो मुझे...

एक बार मेरा चित्र खींच, रंग भर देखो
हलकी सी मुस्कुराहट होठों पर आयेगी,
शबनम को पलकों पर आनें मत देना
मेरी मौत से पहले, एक बार
अपने ही जीवन को केनवास समझो
एक चित्र रचो मेरा...

*** राजीव रंजन प्रसाद

11 comments:

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

विषय बहुत सशक्त है परंतु उसकी मृत्यु के लिए केवल माँ ज़िम्मेदार नही.. एक घटिया सोच से ग्रसित समाज ज़िम्मेदार है.. आपका प्रयास अच्छा है..

DR.ANURAG ARYA said...

bhavpurn kavita....maa ki jagah kuch aor shabd lete to....

~nm said...

Dil ko chhoone waali..

रंजू ranju said...

एक अजन्मी कली की पुकार को आपने सही लफ्जों में बाँधा है राजीव जी ..

बाल किशन said...

आँखे नम सी हो गई हैं.
क्या कहूँ?

mehek said...

bahut hi marmsprashi kavita,nanhi titli ka dil hi khol ke rakh dia,maa ko rona to aayega hi,bahut badhai

अभिषेक ओझा said...

जो मार दे वो माँ ही कहाँ हुई ?

राकेश जैन said...

Bahut samvendansheel hai ye Kavita, aaj ke is sach ne mano humari ek manyta ko khandit kar dia hai , hum kahte the "Poot sapoot sune hain lekin mata nahi kumata"

Udan Tashtari said...

भावुक कर देने वाली रचना.

महावीर said...

बहुत ही संवेदनशील, एक ऐसा विषय जिसका नाम सुनते ही दिल पिघल जाता है और फिर राजीव रंजन के शब्दों को भावों में पिरोना - दिल को ना छुए, यह कैसे हो सकता है। बहुत ही मार्मिक रचना जो
काफ़ी देर तक मस्तिष्क को झंझोड़े देती है।
बधाई!

शोभा said...

राजीव जी
इतने सुन्दर चित्र के साथ आपकी यह कविता दिल के आर-पार हो गई। सच में पढ़कर दिल काँप उठा। हम सब जानते हैं, समझते हैं । पता नहीं यह सब कब तक चलेगा? इसका परिणाम है कि बालिकाओं की संख्या दिन पर दिन कम होती जा रही है। एक दिल को छू लेने वाली सशक्त रचना के लिए हृदय से बधाई।