Wednesday, August 06, 2008

ज़ुल्फें..


बांध कर न रखा करो ज़ुल्फें अपनी

नदी पर का बाँध ढहता है

तबाही मचा देता है

एसा ही होता है

जब तुम

एकाएक झटकती हो खोल कर ज़ुल्फें..


*** राजीव रंजन प्रसाद

7 comments:

Nitish Raj said...

....और जुल्फें खोल दी तो बदरी छा जाएगी...
फिर हो जाए इस पर भी...

सुंदर...अति उत्तम।।।।

नीरज गोस्वामी said...

विलक्षण शब्द प्रयोग...वाह...
नीरज

seema gupta said...

बांध कर न रखा करो ज़ुल्फें अपनी

नदी पर का बाँध ढहता है
" great imagination of words, wonderful"
Regards

Anil Pusadkar said...

kamaal hai rajeev jee

श्रद्धा जैन said...

Sunder aapne shandon ka chayan khoob kiya hai

डुबेजी said...

rajeev ji namaskar mere cartoons par tippani ke liye dhanyawad apki tippani mujhe behtar kam karne ki aseem oorja pradan karti hain please continue giving your valuable comments

Udan Tashtari said...

उम्दा, क्या बात है!