Tuesday, September 02, 2008

मुट्ठी में एक तमंचा है अंकल...


नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है?
मुट्ठी में एक तमंचा है अंकल
मैंने इससे ही कत्ल किया है!!

सुनता हूँ, गाना नये दौर का है
सागर से दरिया पहाड़ों की ओर
बहता चला है, कहता चला है
पश्चिम से सूरज निकलना तय है
बिल्ली ने अपने गले ही में घंटी
बाँधी है और नाचती है छमा-छम
चूहा नशे में वहीं झूमता है।
जंगल का भी एक कानून है
शेर जियेगा, मारेगा सांभर
फिर वो दहाड़ेगा, राजा है आखिर?
लेकिन नहीं लाज आती है आदम
जो तुम जानवर बन के कॉलर उछालो
बनाते हो जो भेड़िया अपनी पीढ़ी
अभी भी समय है, संभल लो संभालो।

बच्चे नहीं बीज पैदा करो तुम
सही खाद पानी उन्हें चाहिये फिर
पानी में जलकुम्भियाँ ही उगेंगी
नहीं तो नीम की शाख ही पर
करेला चढ़ेगा, कडुवा बकेगा
ये वो दौर है जिसमें है सोच सूखी
पैसा बहुत, आत्मा किंतु भूखी
हम बन के इक डायनासोर सारे
तरक्की के बम पर बैठे हुए हैं
जडें कट गयीं, फिर भी एठे हुए हैं
मगर फूल गुलदान में एक दिन के।
तूफान ही में उखड़ते हैं बरगद
जो बचते हैं हम उनको कहते हैं तिनके।

तो आओ मेरे देश बच्चे बचाओ
उन्हें चाहिये प्यार और वो किताबें
जिनपर कि मैकाले का शाप ना हो
ये सच है कि ईस्कूल हैं अब दुकानें
“गुरूर-ब्रम्हा” के बीते जमाने
शिक्षा बराबर हो अधिकार हो
किस लिये बाल-बच्चों में दीवार हो
बंद कमरे न दो, दो खुला आंगन
झकझोर दो, गर न चेते है शासन
बादल न होंगे न बरसेगा सावन
तो एक आग सागर जला कर सवेरा
लायेगी, पूरा यकीं गर बढ़ोगे
वरना जो कीचड़ से खुश हो, कमल है
पानी घटेगा तो केवल सड़ोगे
मोबाइलों को, एसी बसों को
किनारे करो, ऐसा माहौल दो
घर से बुनियाद पाये जो बच्चा बढ़े
विद्या के मंदिर में दीपक जलें

*** राजीव रंजन प्रसाद
16.12.2007

8 comments:

Nitish Raj said...

बहुत बड़ी बात मांग रहे हो ये तो मुश्किल है पर संभव है, कोशिश में हैं हम। लेकिन पहली तीन लाइन से बचाने का प्रयास हमें ही करना है। सही सोच।

पंगेबाज said...

अब इत्ता भी न डराओ यार .

Lovely kumari said...

आपका यह सपना सपना ही रहने वाला है .हम नही बदलेंगे कभी

vipinkizindagi said...

अच्छी पोस्ट

कामोद Kaamod said...

ऐसे सपनों को सपना ही रहने को
पंख लगाकर उड़ने ना दो

शहरोज़ said...

kavita निश्चित ही सराहनीय है.
कभी समय मिले तो हमारे भी दिन-रात आकर देख लें:

http://shahroz-ka-rachna-sansaar.blogspot.com/
http://hamzabaan.blogspot.com/
http://saajha-sarokaar.blogspot.com/

योगेन्द्र मौदगिल said...

Wah..Wah
क्या बात है भाई....

Dev said...

First of All Wish U Very Happy New Year....

Sunder Rchana ....

BAshai..