सफर - राजीव रंजन प्रसाद

Saturday, August 05, 2017

वीर गेंद सिंह की शहादत (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 48)

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परलकोट नैसर्गिक स्थल है। उसकी सीमा को एक ओर से कोतरी नदी निर्धारित करती है। तीन नदियों का संगम परलकोट की सुन्दरता को चार चाँद लगा देता...
Thursday, August 03, 2017

स्त्रीराज्य बस्तर और महारानी प्रमिला (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 47)

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महाभारत युद्ध की समाप्ति के पश्चात युधिष्ठिर ने जब अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा छोड़ा था, तब उस घोड़े की रक्षा में स्वयं अर्जुन सेना के साथ चले थ...

नमक के बोरे में आक्रांता (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 46)

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राजा दलपतदेव (1731-1774 ई.) के समय तक मराठा राज्य की सीमा बस्तर से लग गयी थी। मराठा शासकों ने अपनी विस्तारवादी नीति के तहत पहले रतनपुर ...
Tuesday, August 01, 2017

बल, छल, वीरगति और विजय (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 45)

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सत्ता को ले कर पारिवारिक खींचातानी, षडयंत्र, छल आदि एक दौर की सामान्य घटना हुआ करती थी। ऐसे में स्थिति तब अधिक जटिल हो जाती थी जब आंतरि...

मधुरांतक देव और नरबलि बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ (भाग – 44)

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बस्तर अंचल में नाग राजाओं का शासन विभिन्न मण्डलों में विभाजित करता था, इन्ही में से एक था मधुर मण्डल जिसमें छिन्दक नागराजाओं की ही एक क...
Monday, July 31, 2017

बस्तर में सागर (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 43)

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हमने उन विरासतों को भी नहीं सम्भाला जो हमारी ही सुरक्षा के निमित्त निर्मित किये गये थे। छत्तीसगढ राज्य के ऐतिहासिक दृष्टि के महत्वपूर्ण...
Saturday, July 29, 2017

गोपनीयता और क्रांति (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 42)

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योजना और अनुशासन का ऐसा उदाहरण विश्व में घटित सफलतम क्रांतियों में भी कम देखा गया है जहाँ एक विशाल भूभाग आंदोलित हो लेकिन उसकी तैयारियो...

राजा-प्रजा दोनो के नाम से राजधानी (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 41)

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राजाओं-महाराजाओं के नाम पर कितने ही नगर और शहर बसे हैं लेकिन ऐसे उदाहरण इतिहास में कम है जब प्रजा के नाम पर उन्होंने ऐसा किया हो। इसके ...
Friday, July 28, 2017

अंग्रेजों वाला विकास (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 40)

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रायबहादुर पंडा बैजनाथ (1903 – 1910 ई.) बस्तर राज्य में अधीक्षक की हैसियत से नियुक्त हुए थे। वे अंग्रेजों द्वारा प्रसारित विकास की परिभा...
Wednesday, July 26, 2017

जन-संघर्ष और स्कंदवर्मन (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 39)

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अर्थपति भट्टारक (460-475 ई.) राजसिंहासन पर बैठे तब महाकांतार से कोशल तक तथा कोरापुट से बरार तक के क्षेत्र पर नल-त्रिपताका लहराने का दौर...

कॉग्रेस का काकीनाड़ा अधिवेशन और बस्तर (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 38)

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यह बार बार उठने वाला प्रश्न है कि जिस दौरान राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन मुखर था, उन दिनों बस्तर के भीतर कैसी गतिविधियाँ चल रही थीं? बस्...

वायसराय से मुलाकात (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 37)

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ब्रिटिश-भारत के गवर्नर जनरल ‘द मार्कस ऑफ लिनलिथगो’, महारानी प्रफुल्ला से मुलाकात करना चाहते थे। यह भी पहला ही अवसर था जब इस आदिवासी राज...
Monday, July 24, 2017

राजा की रिजर्व सेना (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 36)

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मराठा राज्यों के लिये राजस्व के प्रमुख स्त्रोत आकस्मिक हमले हुआ करते थे; 1809 ई. में रावघाट की पहाड़ियों से हो कर नारायणपुर के भीतर प्...
Sunday, July 23, 2017

भोंगापाल, बोधघाट और पुराने रास्ते (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 35)

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उत्तरापथ और दक्षिणापथ को जोडते वे कौन से प्राचीन मार्ग थे? क्या ये रास्ते बस्तर हो कर भी गुजरते थे? क्या बौद्ध और जैन धर्म के प्रचार प्...
Saturday, July 22, 2017

विश्व-आश्चर्यों में शामिल होना चाहिये कैलाश मंदिर - एलोरा

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नवरंगपुर विजय और धनुकाण्डैया (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 34)

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बहुत ही कहानियाँ अनकही रह गयीं और बहुत सी परम्परायें मिटने के कगार पर पहुँच गयी हैं। नवरंगपुर विजय रियासतकालीन बस्तर की बहुत बड़ी घटना थ...
Friday, July 21, 2017

स्त्री प्रशासक नाग राजकुमारी मासकदेवी (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 33)

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बस्तर को समझने के विमर्श में आम तौर पर लोग मासकदेवी को लांघ कर निकल जाते हैं; संभवत: इसी लिये इस महत्वपूर्ण स्त्रीविमर्श के अर्थ से अबू...
Thursday, July 20, 2017

गुरु घासीदास, दंतेश्वरी मंदिर और नरबलि (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 32)

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छत्तीसगढ रज्य गुरु घासीदास का कृतज्ञ है जिन्होंने यहाँ की मिट्टी को अपनी उपस्थिति तथा ज्ञान से पवित्र किया था। गुरू घासीदास का जन्म 18 ...
Tuesday, July 18, 2017

राजा पर मुकदमा (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 31)

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डलहौजी ने वर्ष 1854 में नागपुर राज्य को दत्तक निषेध नीति के तहत हड़प लिया, इसके साथ ही बस्तर शासन अंग्रेजों के सीधे नियंत्रण में आ गया। ...
Monday, July 17, 2017

सेंट जॉर्ज ऑफ जेरुसलम (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 30)

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राजा रुद्रप्रताप देव (1891 – 1921 ई.) का शासन समय अंग्रेजों के सीधे प्रभाव में था। केवल छ: वर्ष की आयु में रुद्रप्रताप देव राजा बने तथा...
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राजीव रंजन प्रसाद
बचेली (दंतेवाडा), छत्तीसगढ), India
स्वयं से अपरिचित हूँ, अपनी तलाश जारी है.
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