सफर - राजीव रंजन प्रसाद

Friday, June 30, 2017

कीर्तिमान है किरन्दुल – कोटावलसा रेल्वे लाईन (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 13)

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दंतेवाड़ा क्षेत्र में औद्योगीकरण की प्रथम आहट के साथ ही किरन्दुल को विशाखापट्टनम से जोड़ने की आवश्यकता महसूस की जाने लगी थी। इस सम्बन्ध म...
Thursday, June 29, 2017

नक्सलवाद – पहली विफलता और पहली सफलता (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 12)

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बस्तर में नक्सलवाद की प्रथम असफल दस्तक वर्ष 1967 में सुनाई पड़ी थी। आंध्रप्रदेश की ओर से प्रवेश कर नक्सलवादियों द्वारा पहली बड़ी कार्रवाई...

बनती-टूटती पाठशाला (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 11)

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बस्तर में राजा भैरमदेव का शासन समय था। अंग्रेजों के प्रेक्षण-निरीक्षण के साथ वर्ष 1886 में एक साथ तीन विद्यालय खोले गये। ये तीनों विद्य...
Wednesday, June 28, 2017

एक विरासत टुकड़े आठ (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 10)

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स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद समय अपनी रफ्तार से चला। राजे रजवाड़े अपनी गरिमा, दौलत तथा प्रभाव लुटा चुके थे तो किसी वन्य क्षेत्र के आदिवासी...
Tuesday, June 27, 2017

अंतानम अविजितानम (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 9)

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मौर्य कालीन प्राचीन बस्तर उस ‘आटविक जनपद’ का हिस्सा था जो स्वतंत्र शासित प्रदेश बन गया था। सम्राट अशोक ने कलिंग़ (261 ईसा पूर्व) को जीतन...
Sunday, June 25, 2017

जब असफल रहा अंग्रेज जासूस (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 8)

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18 जनवरी 1795 को अंग्रेज जासूस कैप्टन जे डी बलण्ट, चुनारगढ़ होते हुए कांकेर रियासत में प्रविष्ठ हुआ। ईस्ट इंड़िया कम्पनी यहाँ के ज...
Saturday, June 24, 2017

सुकमा के रामराज और रंगाराज (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 7)

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बस्तर पर चालुक्य/काकतीय राजाओं के अधिकार के पश्चात सुकमा के जमींदारों ने वहाँ के राजाओं से हमेशा वैवाहिक सम्बन्ध बना कर रखे इस कारण इस ...
Friday, June 23, 2017

एक हथिनी के लिये खिंच गयीं तलवारें (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 6)

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कभी दक्षिण बस्तर में हाथी  बहुतायत में थे। राज्य की सीमा के भीतर अवैध रूप से हाथी पकड़ने को ले कर बस्तर तथा जैपोर राज्य (वर्तमान ओडिशा म...
Thursday, June 22, 2017

डाकिये तलवार रखते थे और हरकारे भाला (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 5)

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कल्पना कीजिये उस दौर की जब ग्राम-डाकिये तलवार ले कर चला करते थे और हरकारे भाला। बस्तर में डाक व्यवस्था को आरम्भ करने के पीछे का मुख्...
Wednesday, June 21, 2017

भोपालपट्टनम में उजाला था (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 4)

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भोपालपट्टनम की वर्तमान संकल्पना पिछडेपन और उपेक्षा का जो चित्र सामने लाती है इसके ठीक उलट रियासतकाल में यह एक प्रगतिशील जमीदारी थी। इस ...
Tuesday, June 20, 2017

प्रथम महिला शिक्षक और प्रथम महिला शासक (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग – 3)

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उन्हें बस्तर में पहली महिला शिक्षक होने का गर्व प्राप्त है। वे बस्तर की पहली महिला शासक महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी की अध्यापिका थीं।...

जब बस्तर हाई स्कूल में जलाया गया यूनियन जैक (बस्तर: अनकही-अनजानी कहानियाँ, भाग - 2)

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जगदलपुर बस्तर रियासत की एक जागृत राजधानी थी तथा यहाँ तत्कालीन क्रांतिकारी गतिविधियों एवं ब्रिटिश खिलाफत के आंदोलन का नेतृत्व श्री पी...
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प्लम्बली के लकड़ी के पुल (बस्तर: अनकही अनजानी कहानियाँ, भाग 1)

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बस्तर के चालुक्य शासक राजा रुद्रप्रताप देव के शासनकाल  (1891 – 1921 ई.) में स्टेट इंजीनियर के पद पर ब्रिटिश अधिकारी प्लम्बली पदस्थ ह...
Thursday, June 08, 2017

अन्नदाता कब तक अनुत्तरित रहेंगे?

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व्यवस्था ने किसानों को हमेशा दोयम समझा है। हम विकास-गति के आंकडों पर प्रसन्न और गमगीन हो जाते हैं जबकि भारतीय अर्थशास्त्र की बुनिया...
Sunday, June 04, 2017

हमारा किताबी आपदा प्रबंधन और माउंट सेंट हेलेन्स ज्वालामुखी

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माउंट हेलेन्स का जिक्र करते हुए मैं जवालामुखी और उसकी विभीषिकाओं पर बात नहीं करना चाहता अपितु मेरी चिंता है कि प्रकृति और प्राकृतिक...

एक पेड़ के बदले एक सिर

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यह वर्ष 1859 की घटना है जिसे कालांतर में "कोई आन्दोलन" के रूप में जाना गया। बस्तर रियासत के राजा और दीवान की उपेक्षा करते ...
Saturday, June 03, 2017

मावल्यान्नॉग - एशिया में स्वच्छतम एक भारतीय गाँव

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एशिया का सबसे साफ-सुथरा गाँव भारत में है इस बात का गर्व किसे नहीं होगा? मेघों की धरती मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले में अवस्थित एक ...
Thursday, June 01, 2017

पर्यावरण संरक्षण और हम

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प्रेरक प्रसंग है कि एक बार गांधीजी ने दातुन मंगवाई। किसी ने नीम की पूरी डाली तोड़कर उन्हें ला दिया। यह देखकर गांधीजी उस व्यक्ति प...
Wednesday, May 31, 2017

विलुप्त होता जीवजगत, खतरे में इंसान भी

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प्रकृति जिन जीवों को अपने सुचारू संचालन में अनुपयुक्त पाती है उनसे पीछा छुडा लेती है। उदाहरण के लिए डायनासोर जो एक समय धरती पर व्यापक...
Tuesday, May 30, 2017

जैव विविधता संवर्धन ही पर्यावरण संरक्षण है

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यह धरती हमारे सौरमण्डल का सबसे सुन्दर ग्रह है। इसे विशिष्ठ और अद्भुत बनाता है इसका पर्यावरण; इसमें उपस्थित जलवायु और यहाँ का जीव जगत।...
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राजीव रंजन प्रसाद
बचेली (दंतेवाडा), छत्तीसगढ), India
स्वयं से अपरिचित हूँ, अपनी तलाश जारी है.
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