सफर - राजीव रंजन प्रसाद

Monday, April 30, 2007

वही रास्ता..

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मुझे मौत ही की सजा मिले। मुझे गम के फंदे में झोल कर, तुझे मुस्कुराने की बात हो मुझको कबूल फिर रात है। मुझे उफ न करने का दम्भ है मुझे नश्तरों...
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Friday, April 20, 2007

रिक्त...

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गुजरा हुआ जमाना जिस पेड पर टंगा था बंदर वहाँ बहुत थे कुछ पोटली से उलझे मिल गाँठ खोल डाली पर हिल गयी जो डाली पल झर गये नदी में घुट मर गये नदी...
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Sunday, April 15, 2007

शक

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तुम याद आये और हम खामोश हो गये पलकों पे रात उतरी, शबनम से रो गये सौ बार कत्ल हो कर जीना था फिर भी मुमकिन अश्कों के सौ समंदर पीना था फिर भी म...
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Saturday, April 14, 2007

तुम और क्षणिकायें..

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तुम -१ मेरे बगीचे के गुलाब मुस्कुराते नहीं थे हवा मुझे छू कर गुनगुनाती नहीं थी परिंदों नें मुझको चिढाया नहीं था मेरे साथ मेरा ही साया नहीं थ...
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Friday, April 13, 2007

ए मेरे दोस्त

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ज़िन्दगी अब तेरे नाम पे हँस के देखा और छल छल के भरी आँख का पानी मुझको चुपचाप कान ही में कह गया देखो होठ इतने भी न फैलाओ मेरे यार सुनो ग़म को स...
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Wednesday, April 11, 2007

प्यासा और पानी...

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प्यासा समंदर के किनारे मर गया पानी के नमक हैं, युवक मेरे देश के प्यासे की चिता पर फट पडे बादल तेजस्वी घनघोर हैं, युवक मेरे देश के प्यासे की ...
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Saturday, April 07, 2007

तुम कहाँ थे?

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जब नेता बिक रहे थे विधान सभा में फेकी जा रही थी माईकें टीवी पर बिना पतलून के दिखाई जा रही थी खादीगिरि ”उनके” इशारों पर हो रहे थे एनकाउंटर्स ...
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Monday, March 26, 2007

एक संवाद सूरज से..

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कई भोर बीते, सुबह न आई तो सूरज से पूछा हुआ क्या है भाई? पिघलती हुई एक गज़ल बन गये हो ये पीली उदासी है या चाँदनी है वो अहसास गुम क्यों, वो गर्...
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Saturday, March 10, 2007

"निठारी के मासूम भूतों नें पूछा"

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वो चाकलेट जब नाखून भरे हाथ बन जाती होगी तो मासूम छौने सी, नन्ही सी, गुडिया सी छोटी सी बिल्ली के बच्चे सी बच्ची सहसा सहम कर, रो कर, दुबक कर क...
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Thursday, February 15, 2007

टुकडे अस्तित्व के..

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जरासंध की जंघाओं से दो फांक हो कर जुडते हैं इस तरह टुकडे अस्तित्व के जैसे कि छोटी नदिया गंगा में मिल गयी हो चाहो तो जाँच कर लो अब मिल गया है...
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Monday, February 05, 2007

गज़ल

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निगाह मिल न सकी कैसी मुलाकात हुई होठ खामोश रहे, आज कितनी बात हुई.. मैनें सपनों को डुबोया तो ताल सूख गया मैनें सपनों को जगाया तो कितनी रात हु...
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Monday, January 22, 2007

खबरें…

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कब हुई सगाई, कब होगी शादी कहाँ हनीमून और किस अस्पताल में बच्चे महीनों से टेलीविजन पर बन सतरंगी समाचार और रंगबिरंगा हो कर रंगीनपृष्ठी अखबार ख...
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Tuesday, January 16, 2007

बडा स्कूल…

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स्कूल बहुत बडा है डिजाईनर दीवारें हैं हर कमरे में ए.सी है एयरकंडीश्नर बसें आपके बच्चों को घर से उठायेंगी यंग मिस्ट्रेस नयी टेकनीक से उन्हे प...
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Wednesday, December 27, 2006

कुछ तो बोलो

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अधकच्ची अधपक्की भाषा कैसी भी हो कुछ तो बोलो.. खामोशी की भाषा में कुछ बातें ठहरी रह जाती हैं आँखों के भीतर गुमसुम हो गहरी गहरी रह जाती हैं मै...
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Tuesday, December 05, 2006

टुकडे अस्तित्व के..

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मन का अपक्षय आहिस्ता आहिस्ता मुझको अनगिनत करता जाता है नदी मेरे अस्तित्व से नाखुश है और मुझे महज इतना ही अचरज है इतना तप्त मैं टूटता हूं पुन...
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Thursday, November 30, 2006

गज़ल

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जिस राह पर चलो तुम, मेरी भी राह हो पग-पग में गुल बिछे हों, पेडों की छांह हो.. इस तरह मुझसे यार, निगाहें चुराये है जैसे मेरी निगाह, उसी की नि...
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Wednesday, November 29, 2006

गज़ल

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जैसे इकलौता गुल खिल कर, काँटों को बेमोल बना दे सीपी क्या है एक खोल है, मोती हो अनमोल बना दे.. तुम होते हो खो जाता हूं, फिर अपनी पहचान साथ है...
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Friday, November 24, 2006

काला जादू

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काला जादू जब कि बादल नहीं होते जी करता है खींच लूं चोटी तुम्हारी और तुम झटक कर सिर आँखों को तितलियाँ कर लो अब कि जब मेरी हथेलियों में ...
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Tuesday, November 21, 2006

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कतरा-कतरा उसने मुझको छोड मेरे कतरे कतरे को चाहा था उसने कतरा कतरा ले कर मुझको छोड दिया जीने.. मैं कहता हूँ सागर से मुझमे डूब मरो कम्बख्त कले...
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बच्चों सा मै अपनें सब्र की शरारत से हैरां हूँ ईतना बडा पत्थर कलेजे पर ढो लाया और अब टूटे हुए कलेजे पर टूटे हुए खिळौने सा रूठता है.. बच्चों स...
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राजीव रंजन प्रसाद
बचेली (दंतेवाडा), छत्तीसगढ), India
स्वयं से अपरिचित हूँ, अपनी तलाश जारी है.
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