सफर - राजीव रंजन प्रसाद

Monday, January 22, 2007

खबरें…

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कब हुई सगाई, कब होगी शादी कहाँ हनीमून और किस अस्पताल में बच्चे महीनों से टेलीविजन पर बन सतरंगी समाचार और रंगबिरंगा हो कर रंगीनपृष्ठी अखबार ख...
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Tuesday, January 16, 2007

बडा स्कूल…

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स्कूल बहुत बडा है डिजाईनर दीवारें हैं हर कमरे में ए.सी है एयरकंडीश्नर बसें आपके बच्चों को घर से उठायेंगी यंग मिस्ट्रेस नयी टेकनीक से उन्हे प...
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Wednesday, December 27, 2006

कुछ तो बोलो

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अधकच्ची अधपक्की भाषा कैसी भी हो कुछ तो बोलो.. खामोशी की भाषा में कुछ बातें ठहरी रह जाती हैं आँखों के भीतर गुमसुम हो गहरी गहरी रह जाती हैं मै...
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Tuesday, December 05, 2006

टुकडे अस्तित्व के..

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मन का अपक्षय आहिस्ता आहिस्ता मुझको अनगिनत करता जाता है नदी मेरे अस्तित्व से नाखुश है और मुझे महज इतना ही अचरज है इतना तप्त मैं टूटता हूं पुन...
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Thursday, November 30, 2006

गज़ल

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जिस राह पर चलो तुम, मेरी भी राह हो पग-पग में गुल बिछे हों, पेडों की छांह हो.. इस तरह मुझसे यार, निगाहें चुराये है जैसे मेरी निगाह, उसी की नि...
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Wednesday, November 29, 2006

गज़ल

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जैसे इकलौता गुल खिल कर, काँटों को बेमोल बना दे सीपी क्या है एक खोल है, मोती हो अनमोल बना दे.. तुम होते हो खो जाता हूं, फिर अपनी पहचान साथ है...
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Friday, November 24, 2006

काला जादू

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काला जादू जब कि बादल नहीं होते जी करता है खींच लूं चोटी तुम्हारी और तुम झटक कर सिर आँखों को तितलियाँ कर लो अब कि जब मेरी हथेलियों में ...
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Tuesday, November 21, 2006

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कतरा-कतरा उसने मुझको छोड मेरे कतरे कतरे को चाहा था उसने कतरा कतरा ले कर मुझको छोड दिया जीने.. मैं कहता हूँ सागर से मुझमे डूब मरो कम्बख्त कले...
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बच्चों सा मै अपनें सब्र की शरारत से हैरां हूँ ईतना बडा पत्थर कलेजे पर ढो लाया और अब टूटे हुए कलेजे पर टूटे हुए खिळौने सा रूठता है.. बच्चों स...
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Monday, November 20, 2006

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मौत मेरे कलेजे को कुचल कर तुम्हारे मासूम पैर जख्मी तो नही हुए? मेरे प्यार मेरी आस्थाए सिसक उठी है, इतना भी यकीन न था तुम्हे कह कर ही देखा हो...
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उधार की ज़िन्दगी मैने सोचा न था कि सिर्फे एक स्वप्न मुझे एक आसमान और अमावस की अँतहीन रात भेट करेगा और मेरे कँधे पर अहसान भरा हाथ रख कर कहेगा ...
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खामोश मौत वो जो तङप भी नही पाते है उनसे क्या पूछते हो मौत क्या है, तङप कर जिनमे सह लेने का साहस आ जाता हो, उनसे क्या पूछते हो मौत क्या है......
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मै बिखरता जाता हूँ मैने फूटा हुआ आईना जोडने कि कोशिश मे ज़िन्दगी बटोर ली दर्द की लेई बना कर सब कुछ जोडता जाता हूँ...... वक्त के साथ कडुवाहट ज...
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मूरत और भी लोग है जिन्हे तुमसे मुहब्बत होगी और भी दिल है, जिन्हे तेरा दर्द भाता है और भी आह तेरे ज़ख्म से उभरती है और भी टीस तुझे देख कर उतरत...
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आत्मसंतोष वे सारे लोग जिनसे धोखा खाया है तुमने भले थे.. उन्होने तुम्हे अनुभव दिया है और चेतना का उपहार भी और ले गये हैं साथ एक आत्मग्लानि वे...
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गज़ल मन को भी रफू कीजिये, केंचुल निकालिये, बन कर दिखे जो आदमी, हैरत में डालिये.. रंगों ने ढक रखा है, वो चेहरा गुलाब सा, गो सादगी कहाँ है कि,च...
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परिचय......राजीव रंजन प्रसाद कविता ईन्हें विरासत में मिली है. कवि के शैशवकाल में ही पिता का देहांत हो गया था. पिता की लेखनी ही मुझमें जीती ह...
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राजीव रंजन प्रसाद
बचेली (दंतेवाडा), छत्तीसगढ), India
स्वयं से अपरिचित हूँ, अपनी तलाश जारी है.
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