पहाड से टकरा कर
लौट आता है तुम्हारा नाम
तुम से टकरा कर
लौट लौट आती है मेरी धडकन
कितनी कठोरता जानम
कि पर्बत हो गयी हो..
*** राजीव रंजन प्रसाद
अच्छा है भाई.
सुंदरतम। चंद पंक्तियों में बहुत बड़ी बात वह भी बहुत ही खूबसूरती के साथ।
sundar
बहुत उम्दा, क्या बात है!आजकल दिख नहीं रहे हैं आप!!
बहुत अच्छा.... बहुत सुंदर ....
अच्छी रचना, बधाई हो
अच्छा है भाई.
ReplyDeleteसुंदरतम। चंद पंक्तियों में बहुत बड़ी बात वह भी बहुत ही खूबसूरती के साथ।
ReplyDeletesundar
ReplyDeleteबहुत उम्दा, क्या बात है!आजकल दिख नहीं रहे हैं आप!!
ReplyDeleteबहुत अच्छा....
ReplyDeleteबहुत सुंदर ....
अच्छी रचना, बधाई हो
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