रात और चांद का एक रिश्ता है
नींद और चांद का एक रिश्ता है
मेरा और चांद का एक रिश्ता है
मै, नींद, रात और चांद
जब इकट्ठे होते हैं
महफिलें सजती हैं
और ज़िन्दगी जाग जाती है..
*** राजीव रंजन प्रसाद
अति सुन्दर!
बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति बधाई हो आपको राजीव जी
Ragjeev ji, bhut sundar. likhate rhe.
जागती हुई, जगाती हुई सुंदर रचना.सरोकार की मिसाल भी.===================बधाई डा.चन्द्रकुमार जैन
मै, नींद, रात और चांदजब इकट्ठे होते हैंमहफिलें सजती हैंऔर ज़िन्दगी जाग जाती है..अच्छा लिखा है।
अलग नजरिये से पेश किया अपने आपको चाँद और रात के साथ...खुबसूरत...
राजीव जीबहुत दिनों बाद नजर आए लेकिन आप की इस रचना ने सारे गिले शिकवे दूर कर दिए...संवेदनाओं का जो संसार शब्दों से आप रचते हैं वो कमाल का होता है...बधाई नीरज
सुन्दर
अति सुन्दर!
ReplyDeleteबहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति बधाई हो आपको राजीव जी
ReplyDeleteRagjeev ji, bhut sundar. likhate rhe.
ReplyDeleteजागती हुई, जगाती हुई सुंदर रचना.
ReplyDeleteसरोकार की मिसाल भी.
===================
बधाई
डा.चन्द्रकुमार जैन
मै, नींद, रात और चांद
ReplyDeleteजब इकट्ठे होते हैं
महफिलें सजती हैं
और ज़िन्दगी जाग जाती है..
अच्छा लिखा है।
अलग नजरिये से पेश किया अपने आपको चाँद और रात के साथ...खुबसूरत...
ReplyDeleteराजीव जी
ReplyDeleteबहुत दिनों बाद नजर आए लेकिन आप की इस रचना ने सारे गिले शिकवे दूर कर दिए...संवेदनाओं का जो संसार शब्दों से आप रचते हैं वो कमाल का होता है...बधाई
नीरज
सुन्दर
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