
खाली सडक पर
बडी दूर से एक पत्थर को मारता हुआ ठोकर
सोचता रहा कि आसमान में सूराख
क्या रोशनी की नदी धरती पर उतार देगा?
बडी दूर से एक पत्थर को मारता हुआ ठोकर
सोचता रहा कि आसमान में सूराख
क्या रोशनी की नदी धरती पर उतार देगा?
अपने बौनेपन को उँट की टाँगों के पैमाने से नापा
पहाड मुझे देख कर मुस्कुराता रहा
जिसकी फुनगी पर आसमान टंगा था
आसमान में डैने फैला कर उडती हुई चील
गोरैया हुई जाती थी
मैनें अपनी कल्पना को उसके पंखों में बाँध दिया
फिर अपनी तलाश की
तो चींटी की तरह रेंगता मिला
आसमान से देखो तो आदमी कीडे नज़र आते हैं
मैनें मुस्कुरा कर तबीयत से पत्थर उछाला
”छपाक” आवाज़ आयी दो पल बाद
और मेरे पाँव सडक पर बढने लगे...
मैनें मुस्कुरा कर तबीयत से पत्थर उछाला
”छपाक” आवाज़ आयी दो पल बाद
और मेरे पाँव सडक पर बढने लगे...
*** राजीव रंजन प्रसाद
सुंदर अभिव्यक्ति.. बहुत बढ़िया
ReplyDeleteअच्छा लिखा है।
ReplyDelete"मैनें अपनी कल्पना को उसके पंखों में बाँध दिया
ReplyDeleteफिर अपनी तलाश की
तो चींटी की तरह रेंगता मिला"
बहुत ही उम्दा.
बेहतरीन.
बधाई.
aap to hamesa hi badhiya likhte hain.jari rakhen
ReplyDeleteआसमान में डैने फैला कर उडती हुई चील
ReplyDeleteगोरैया हुई जाती थी
मैनें अपनी कल्पना को उसके पंखों में बाँध दिया
सुंदर अभिव्यक्ति
bahut khub,aasman to bahut dur hai insaan se,magar man ke bhav bahut achhe,vichar jitne paripakva utni hi chapak se pathat uchalne wali kruti nanhe balman ki aur ishara karti hai,sundar.
ReplyDeletecongratulations for new layout of blog,its beautiful
राजीव जी
ReplyDeleteभाई वाह...कमाल का लिखा है आप ने इस बार. खूबसूरत अभिव्यक्ति पर ढेरों बधईयाँ.
नीरज
वाह! बहुत कमाल का लिखा है, बधाई.
ReplyDeleteआपकी यह कविता बहुत अच्छी लगी। इस पर मुझे इस तरह विचार आया जो मैंने कविता के रूप में दर्ज कर लिया
ReplyDeleteदीपक भारतदीप
आसमान से जो देखा धरती पर
तो इंसान चींटियों की तरह
रेंगता नजर आया
वैसे भी धरती पर इंसान
कब इंसान की तरह चल पाया
चींटियों की रानी लेती है
अपनी प्रजा से सेवा
पर इंसान ढूंढता है
अपने आराम से रहने के लिये कोई राजा
जो उसे खिलाये मुफ्त में मेवा
दौड़ सकता है अपनी टांगो के सहारे
पर फिर भी रैंगना उसे पसंद है
करता है पहाड़ जैसी बातें पर
इंसान का चरित्र हमेशा बौना नजर आया
..............................
Excellent.
ReplyDeleteSandeep Aggarwal
सोचता रहा कि आसमान में सूराख
ReplyDeleteक्या रोशनी की नदी धरती पर उतार देगा?
bahut khoob!