सुन्दरआंखों ने खता की थीआंखों को सजा देतेक्यूं दिन रात तडफ़ने कीहै दिल ने सजा पायी
बड़ा अलग सा बिम्ब है.
अच्छी कल्पना है
बहुत बढिया!
कहीं आंखों में ही खो गये.. बेहद अलग और खूबसूरत,..
Gud imagination.....infact a unique one never read anything like tis before....
राजीव जीबहुत अच्छी कविता है-रचना सागर
चार पंक्तियों मे इतना कुछ जाने कैसे समेट लिया गया है" मेरा चाँदमेरी आँखों की बाहों में लिपट गया है"अद्भुतसस्नेहगौरव शुक्ल
सुन्दर
ReplyDeleteआंखों ने खता की थी
आंखों को सजा देते
क्यूं दिन रात तडफ़ने की
है दिल ने सजा पायी
बड़ा अलग सा बिम्ब है.
ReplyDeleteअच्छी कल्पना है
ReplyDeleteबहुत बढिया!
ReplyDeleteकहीं आंखों में ही खो गये.. बेहद अलग और खूबसूरत,..
ReplyDeleteGud imagination.....infact a unique one never read anything like tis before....
ReplyDeleteराजीव जी
ReplyDeleteबहुत अच्छी कविता है
-रचना सागर
चार पंक्तियों मे इतना कुछ जाने कैसे समेट लिया गया है
ReplyDelete" मेरा चाँद
मेरी आँखों की बाहों में लिपट गया है"
अद्भुत
सस्नेह
गौरव शुक्ल