Monday, November 20, 2006

मौत

मेरे कलेजे को कुचल कर
तुम्हारे मासूम पैर जख्मी तो नही हुए?
मेरे प्यार
मेरी आस्थाए सिसक उठी है,
इतना भी यकीन न था तुम्हे
कह कर ही देखा होता कि मौत आये तुम्हे
कलेजा चीर कर
तुम्हे फूलो पर रख आता......

***राजीव रंजन प्रसाद

3 comments:

  1. Anonymous7:46 AM

    राजीव जी ,
    आप अच्‍छा लिख रहे है, आपका स्‍वागत है

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  2. Anonymous7:48 AM

    आपके कविता का शीर्षक शीर्षक के स्‍थान पर नही आ रहा है, आप शीर्षक को शीर्षक के स्‍थन पर डाले।

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  3. रजीव जी
    बहुत सुन्दर कविता है
    देख कर मन खुश हो गया
    अभिषेक

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